Panchayat Chunav News : राजस्थान में पंचायत राजनीति को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत जयपुर, जोधपुर सहित प्रदेश के 12 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के बोर्ड समय से पहले भंग किए जा सकते हैं। इस संभावित फैसले ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
दरअसल, हाल ही में राज्य चुनाव आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर पूछा था कि पंचायत चुनाव ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के तहत एक साथ कराने हैं या नहीं। इसके बाद सरकार के स्तर पर बैठकों और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सरपंच प्रतिनिधियों को बुलाकर राय ली जा चुकी है और अब संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस बड़े फैसले की ओर तेजी से बढ़ रही है।
‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की तैयारी क्यों जरूरी हो गई?
प्रदेश में आमतौर पर पंचायत चुनाव एक साथ कराए जाते रहे हैं, लेकिन कोरोना काल (2020–2022) में हालात बदल गए। उस दौरान कई पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो गया था, लेकिन चुनाव नहीं हो पाए। सरकार ने तब सरपंचों को ही प्रशासक बनाकर कार्यकाल बढ़ा दिया था और अस्थायी व्यवस्थाओं के तहत काम चलाया गया।
इसी वजह से आज स्थिति यह है कि कुछ जिलों में पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो चुका है, जबकि 12 जिलों में अब भी कार्यकाल बाकी है। यही असमानता ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

चुनाव आयोग के पत्र के बाद तेज हुई हलचल
8 जनवरी को राज्य चुनाव आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर साफ पूछा कि पंचायत चुनाव एक साथ कराने हैं या नहीं। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में पंचायती राज से जुड़े अधिकारियों ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सरपंच प्रतिनिधियों को बुलाकर चर्चा की।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने बोर्ड भंग करने के संकेत भी दे दिए हैं, ताकि सभी जिलों में एक साथ चुनाव कराए जा सकें। अब 17 जनवरी को होने वाले बजट पूर्व संवाद के दौरान मुख्यमंत्री खुद सरपंच प्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर बात कर सकते हैं।
सरपंच संगठनों का क्या कहना है?
राजस्थान सरपंच संघ के प्रवक्ता रफीक पठान के अनुसार, सरकार ने सरपंच प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी राय ली है। उन्होंने कहा कि संगठन सरकार के फैसले के साथ है और यदि एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो उसमें सहयोग किया जाएगा। वहीं जयपुर के सांगानेर क्षेत्र की नरसिंहपुरा ग्राम पंचायत के प्रशासक बंशीधर गढ़वाल का कहना है कि सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की दिशा में गंभीर है और सरपंचों को 15 जनवरी के बाद फिर बातचीत के लिए बुलाया गया है।
सरकार को ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के लिए क्या करना होगा?
अगर सरकार इस फॉर्मूले को लागू करना चाहती है, तो उसे 12 जिलों की जिला परिषद और पंचायत समितियों को कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग करना होगा। इसके अलावा जानकारों का मानना है कि सरकार चुने हुए बोर्ड को 6 महीने पहले भंग कर सभी जिलों में एक साथ चुनाव कराने का रास्ता साफ कर सकती है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की योजना पर पानी फिर सकता है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी दिक्कत क्या है?
सरकार के लिए सबसे बड़ी परेशानी उन जिलों में है, जहां अभी 8 महीने तक कार्यकाल शेष है। बारां, करौली, कोटा और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में यदि बोर्ड समय से पहले भंग किए गए, तो वहां के जनप्रतिनिधि कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यही वजह है कि सरकार को कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर बेहद संतुलित फैसला लेना होगा।
किन जिलों में कार्यकाल खत्म, कहां प्रशासक नियुक्त?
प्रदेश के 21 पुराने जिलों में करीब 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इनमें जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, नागौर, बीकानेर, सीकर, टोंक सहित कई जिले शामिल हैं। इन जिलों में जिला परिषदों में कलेक्टर को प्रशासक नियुक्त किया जा चुका है।
वहीं भरतपुर, दौसा, जयपुर, जोधपुर, अलवर, धौलपुर, बारां, करौली, कोटा, श्रीगंगानगर, सवाई माधोपुर और सिरोही सहित कुल 12 जिलों (नए जिलों को जोड़कर 16) में पंचायत और जिला परिषदों का कार्यकाल अभी बाकी है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट पहले ही 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा पर मुहर लगा चुका है। ऐसे में राज्य चुनाव आयोग अपनी तैयारी में जुट गया है और अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है।
आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि राजस्थान में पंचायत चुनाव एक साथ होंगे या चरणबद्ध तरीके से, लेकिन इतना तय है कि ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज होने वाली है।